www.dharmtoronto.com कविताएँ,लेखन अ – अधिकार का

अ – अधिकार का



वह था ग़रीब

क्या मालूम ग़रीब पैदा हुआ था

या हालात् ने कर दी थी यह हालत

कुछ तो हुआ होगा अन्याय

वरना उसके हिस्से भी वही सूरज था

वही नदी थी, वही हवा थी

फिर कहाँ हो गई चूक?

बहुत सिकुड़े खाँचे थे

कि मुट्ठी बंध पाती

पैर उठाने की जगह नहीं थी

कि वह चल पाता

काश, खुद के लिए लड़ना सिखाती

कोई वर्णमाला –

      अ – अधिकार का

      आ – आग़ का

      इ – इंसाफ़ का

      ई – ईंट का

ऐसी पाठशाला नहीं मिली उसे।

उसे नहीं पढ़ाया किसी ने

स – सत्ता का

श – शक्ति का

ह – हक़ का

जो बदल सकते थे उसकी सोच।

बमुश्किल उसे नसीब हुआ था

दो कमरे का सरकारी स्कूल

मिल गईं थीं कुछ टाटपट्टियाँ

दोपहर के लिए दलिया

पावडर का दूध

मिड-डे मील में

वह सूखी टहनियाँ और

कंडे इकठ्ठे कर रहा होता

कि कुछ तो कम हो एक वक़्त की भूख

समय कहाँ था अ – अधिकार का पढ़ने के लिए।

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