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ब्रीफकेस प्रसंग



मैं दफ़्तर में नया-नया हूँ और दफ़्तर की संस्कृति समझ रहा हूँ। जब कभी, जहाँ कहीं ब्रीफकेस देखता हूँ, भक्त मुद्रा में मैं श्रद्धा से भर जाता हूँ। ब्रीफकेस का स्वरूप कभी मुझे जादुई लगता है तो कभी दैविक।

अस्थाना जी एक अदने-से अधिकारी हैं, पर जब वे अपना ब्रीफकेस झुलाते हुए दफ़्तर में प्रवेश करते हैं तो लगता है जैसे वित्त मंत्री बजट भाषण देने लोकसभा में प्रवेश कर रहे हों। द्वार पर आते ही द्वारपाल अदब से उनका ब्रीफकेस उठा लेता है। अस्थाना जी प्रवेश करते ही प्रसन्नचित्त हो जाते हैं। पहले जब अस्थाना जी ब्रीफकेस धारी नहीं थे लोग उन्हें गाँठते नहीं थे। बाबू उन्हें अपना जूनियर समझते थे और चपरासी यार। ब्रीफकेस ने उन्हें गरिमा दी है और रोब दिया है या यों कहिए कि उन्हें अपनी खोई जवानी वापस मिल गई है। जैसे गंडों और तावीज़ों से मरियल आदमी पहलवान दिखने लगता है, ब्रीफकेस लल्लू अफ़सर को सक्षम अफ़सर बना देता है।

मैंने ब्रीफकेस की महिमा बखानते हुए कई विज्ञापन पढ़े हैं, कई विज्ञापन देखे हैं कि एक चमचमाता ब्रीफकेस सड़क पर पड़ा है और कार का एक पहिया उसके ऊपर चढ़ गया है। फिर भी, ब्रीफकेस साबुत है, कहीं कोई क्रेक नहीं, टूट-फूट नहीं। इस चित्र को देखकर दो तथ्य मेरे दिमाग़ में आते हैं। पहला यह कि ब्रीफकेस नाशवान नहीं है, अमर है और दूसरा यह कि ब्रीफकेस और कार में घरेलू संबंध है, दोनों एक ही संस्कृति के संवाहक हैं। ब्रीफकेस और कार के मधुर संबंधों को लेकर मुझे पंचतंत्र की बंदर और जामुन प्रेमी मगर की कथा याद आ रही है। ऐसे ही एक अफ़सर और ठेकेदार मित्र थे। ठेकेदार अफ़सर के ऑफ़िस रोज़ आता था और अफ़सर उसे धन लाभ के मीठे–मीठे जामुन देता था। एक दिन ठेकेदारनी ने ठेकेदार से कहा ऐसे अफ़सर को आपको घर लाना चाहिए जिसका दिल इतना दरिया है। मैं उसका दिलोदिमाग़ चखूँगी। ठेकेदार ने ठेकेदारनी को बहुत समझाया पर वह नहीं मानी। अन्ततोगत्वा एक दिन ठेकेदार ने अफ़सर से कहा सा’ब आज हमारे घर चलो। अफ़सर फटाफट उसकी कार में बैठ गए। मार्ग में उन्होंने ठेकेदार से पूछा, ‘आज क्या जलसा है भाई?’ ठेकेदार ने कहा सा’ब ठेकेदारनी आपसे बहुत ख़ुश है। वह कह रही थी जो अफ़सर रोज़ इतना धन लाभ करा सकता है उसका दिल कितना दरिया होगा, दिमाग़ कितना तेज़।

अफ़सर ने कहा, ‘ठेकेदार भाई, गाड़ी मोड़ो, ऑफ़िस चलो। ऐसी बात थी तो पहले बताना चाहिए थी। मेरा ब्रीफकेस ऑफ़िस में रखा है, मैं उसी में रखता हूँ अपना दिलोदिमाग़। आजकल ज़माना बहुत ख़राब है। हर कहीं तो ब्रीफकेस ले कर जा नहीं सकते। अफ़सर और ठेकेदार पुनः ऑफ़िस पहुँचे। अफ़सर  ने ब्रीफकेस साथ लिया और ठेकेदारनी से ब्रीफकेस खोल कर मिला। ठेकेदारनी ने उसका खुला दिलोदिमाग़ चखा और उसके बाद उन सबके दिन फिर गए।

कथा तो कथा है, यथार्थ का प्रतिबिम्ब! यह कथा ब्रीफकेस का जो सहज कथा तत्व सामने लाती है, वह यह कि अफ़सर लोग अपना दिलोदिमाग़ ब्रीफकेस में रखते हैं। मैंने कई लोगों को ब्रीफकेस और उसी अदा में गर्दन लटकाए घर से ऑफ़िस और ऑफ़िस से घर आते-जाते देखा है। यदि ब्रीफकेस नहीं होता तो ये बेचारे दिमाग़ कैसे लाते-ले जाते?

कथा तो कथा है, यथार्थ का प्रतिबिम्ब! यह कथा ब्रीफकेस का जो सहज कथा तत्व सामने लाती है, वह यह कि अफ़सर लोग अपना दिलोदिमाग़ ब्रीफकेस में रखते हैं। मैंने कई लोगों को ब्रीफकेस और उसी अदा में गर्दन लटकाए घर से ऑफ़िस और ऑफ़िस से घर आते-जाते देखा है। यदि ब्रीफकेस नहीं होता तो ये बेचारे दिमाग़ कैसे लाते-ले जाते?

यह कथा तत्व जान कर मेरी इच्छा होने लगी कि मैं भी अस्थाना जी का दिलोदिमाग़ चखूँ जो अल्प समय में बड़े साहब के ख़ास पूत बन गए हैं। एक दिन जैसे ही उन्होंने आसन ग्रहण किया मैं उनकी कपाल-क्रिया देखने लगा। उन्होंने ब्रीफकेस खोला, नेपकीन निकाला और स्टाफ क्लब की मैगज़ीन अन्दर ही रहने दी। तद्न्तर, उन्होंने चारों ओर नज़रें दौड़ाईं और आश्वस्त हो कर पसीना पोंछने लगे। मुझे देख कर कहने लगे बहुत बढ़ गया है पेपर वर्क और ब्रीफकेस उठा कर मुझसे दूर रख दिया। पर मैं रिक्त ब्रीफकेस देख चुका था। मुझे कुतूहल हुआ कि उनका दिमाग़ उसमें भी नहीं था और न ही उसमें भूसा ही भरा था। बावजूद इस सबके बॉस उनकी इज्ज़त करते थे। उदाहरण देते कि काम तो अस्थाना जी करते हैं, कागज़ात घर ले जाते हैं और निबटाते हैं। ब्रीफकेस की ‘हिप्टोनाइज़’ कर सकने की इस अद्भुत क्षमता ने मुझे चमत्कृत कर रखा है। जो कुछ नहीं करते वे सब कुछ करते दिखते हैं और जो करते हैं वे कुछ भी करते नहीं दिखते। इस कारण ब्रीफकेस में मुझे रहस्यवाद की प्रतीति होती है, जो है और जो नहीं भी है ऐसा गुत्थमगुत्था दर्शन मुझे ब्रीफकेस में मिलता है।

ब्रीफकेस के इस दैविक स्वरूप के कारण मैं बॉस को भी देवता का अवतार मानता हूँ। वे ब्रीफकेस उठाए जब ऑफ़िस की सीढ़ियाँ चढ़ते हैं तो ब्रीफकेस में काग़ज़ की मात्रा और इसके भार के मारे दोहरे हो जाते हैं। ब्रीफकेस उनसे उठता नहीं, फिर भी वे अपना धर्म निबाहते हैं। उनके लिए पत्नी और ब्रीफकेस एक जैसे हैं। जब उनकी पत्नी का जिक्र होता है वे ब्रीफकेस खोल लेते हैं और जब वे ब्रीफकेस में गोताखोरी कर कागज़ात निकालते होते हैं उन्हें पत्नी की फरमाइशों की याद आ जाती है। कुछ भी हो बॉस ब्रीफकेस को ज़्यादा महत्व देते हैं। ऐसा इसलिए है कि ब्रीफकेस पत्नी की तरह वाचाल नहीं है और उसमें मामले इतने गोपनीय रहते हैं जितने अन्यत्र संभव नहीं है।

ब्रीफकेस के इस दैविक स्वरूप के कारण मैं बॉस को भी देवता का अवतार मानता हूँ। वे ब्रीफकेस उठाए जब ऑफ़िस की सीढ़ियाँ चढ़ते हैं तो ब्रीफकेस में काग़ज़ की मात्रा और इसके भार के मारे दोहरे हो जाते हैं। ब्रीफकेस उनसे उठता नहीं, फिर भी वे अपना धर्म निबाहते हैं। उनके लिए पत्नी और ब्रीफकेस एक जैसे हैं। जब उनकी पत्नी का जिक्र होता है वे ब्रीफकेस खोल लेते हैं और जब वे ब्रीफकेस में गोताखोरी कर कागज़ात निकालते होते हैं उन्हें पत्नी की फरमाइशों की याद आ जाती है। कुछ भी हो बॉस ब्रीफकेस को ज़्यादा महत्व देते हैं। ऐसा इसलिए है कि ब्रीफकेस पत्नी की तरह वाचाल नहीं है और उसमें मामले इतने गोपनीय रहते हैं जितने अन्यत्र संभव नहीं है।

दफ़्तर में एक और अफ़सर है जो ख़ुद को बहुत ज़िम्मेदार समझते हैं। इसलिए वे ब्रीफकेस से संतुष्ट नहीं है, वे सूटकेस लाते हैं। ब्रीफकेस में नेपकीन, पत्रिका और एक-दो फोल्डर ही समा सकते हैं, पर उनके सूटकेस में पूरा इंतजाम रहता है। सूट, टॉवेल, चादर, अंग्रेज़ी उपन्यास आदि उसमें भरे रहते हैं। वह घर से दौरे पर जाने की तैयारी कर के ही आते हैं। वह जहाँ भी जाते हैं सूटकेस साथ ले जाते हैं और अपने भ्रमण-अभ्रमण सब को टूर डायरी में अंकित कर लेते हैं। वे दुःखी है कि ब्रीफकेस-रसिकों ने उनकी इमेज भत्ताभोजी बना दी है और ब्रीफकेस रसिकों के आलोचक-मन उनमें रस लेने लग गए हैं।

कहावत है नया मुल्ला ज़ोर से नमाज पढ़ता है। कुछ ऐसी ही स्थिति मेरी है। मैं ऊहापोह में हूँ कि योग्य और ज़िम्मेदार अफ़सर बनने के लिए मैं ब्रीफकेस लूँ, सूटकेस लूँ या बार-बार तबादलों की संभावना में होलडॉल ले कर एक नया प्रयोग शुरू करूँ। इस दुविधा में मैं बॉस के चेम्बर में ज्ञान प्राप्त करने के लिए पहुँच जाता हूँ, समस्या रखता हूँ और उपकृत हो जाता हूँ। मेरे चिंतन में एक दोहा उभरने लगता है-

ब्रीफ, सूट दोउ पड़े, काके लेऊँ उठाय। बलिहारी गुरू बॉस की, ब्रीफकेस दियो बताय।।

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