उस समय से



उस समय से इस समय तक

बस गडरिए ही चले

गर्दन झुका भेड़ें जुड़ती रहीं।

करोड़ों भेड़ें लील गया महाभारत

कलिंग में बहीं खून की नदियाँ

धुँआ हो गया हिरोशिमा

वियतनाम, ईरान से सीरिया तक

आदमी ही कटा, गडरिए चलते रहे

उस समय से इस समय तक।

राजवंशों की भृकुटियाँ झुका दीं प्रजातंत्र ने

तय था भर पेट घास मिलना भेड़ों को

सचेत हो गए गडरिए

बदल लीं टोपियाँ, खेत और पगडंडियाँ

नहीं बदलीं भेड़ें, सिर झुका जुड़तीं रहीं       

उस समय से इस समय तक।

नहीं दिखी किसी को बंजर होती धरती

बिवाइयाँ फट पड़ीं उसकी छाती पर

दाने को तरसतीं

दर-दर भटकतीं

अंगूठे लगातीं भेड़ें

नहीं देख पाईं राजमार्ग की सड़क

उस समय से इस समय तक।

कोख में घुटे शिशु, माँ की लाश के साथ

भागते बच्चे, युवतियाँ और मर्द

नहीं लांघ पाए नक्शों की लकीरें

बस चश्मदीद रहीं भेड़ें

उस समय से इस समय तक।

बहुत बढ़ी दुनिया अख़बार में

चाँद, मंगल, ब्रह्माण्ड और परे

ज़हर होती हवा, फैलाती रही दमा, तपेदिक

ख़ाँसती रही बुढ़िया, तपता रहा बूढ़ा

लाचार, दवा के लिए तरसती भेड़ें

हाँकते रहे गडरिए 

उस समय से इस समय तक।

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