Category: स्तम्भ लेखन

परेड का आँखों देखा हालपरेड का आँखों देखा हाल

राजपथ जैसा राजमार्ग दुनिया में कहीं नहीं है। गणतंत्र दिवस के दिन तो यह मार्ग स्वर्ग की अप्सराओं और इंद्र को भी मात देता है। सारा देश सलामी दे रहा होता है। यहाँ देश की सुंदरता और साहस की झाँकियाँ ...

वे धन्यवाद नहीं ले रहेवे धन्यवाद नहीं ले रहे

मैं अपने समय के प्रतिष्ठित होते-होते बच गए व्यंग्यकार के साथ बैठा हूँ। उनका जेनेरिक नाम व्यंका है, ब्रांड नेम बाज़ार में आया नहीं, इसलिए अभी उनका नाम बताने में दम नहीं है। यह चर्चा मोबाइल पर रिकॉर्ड हो रही ...

एक व्यंग्यकार का शोधपत्रएक व्यंग्यकार का शोधपत्र

भूमिका: एक लब्ध प्रतिष्ठित पत्रिका के सम्पादक ने मुझसे एक शोधपत्र लिखने का आग्रह किया। मैं क्या, कोई भी रचनाकार संपादक के गच्चे में फँस जाए, और माँग के अनुसार लिख डाले। सो, मैंने अपने जीवन का पहला शोधपत्र गालियों ...

इंडियन पपेट शोइंडियन पपेट शो

(विधानसभा थियेटर खचाखच भरा हुआ था। महामहिम राज्यपाल, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री प्रथम पंक्ति में विराजमान थे। यह विधानसभा सत्र नहीं था पर होहल्ला वैसा ही था। संगीत की फुहारें उठीं और दर्शक चुप होने लगे। स्पीकर ...

बापू का आधुनिक बंदरबापू का आधुनिक बंदर

गुजरात का नाम आए तो सबसे पहले बापू का नाम आता है, फिर फाफड़े, ढोकला, फरसाण और बापू के तीन बंदर। अब हाईटेक जमाना है, बंदर आदमी से ज़्यादा बुद्धिमान हो गए हैं। बापू इस समय होते तो तीन की ...

दाल-बाटी और चूरमादाल-बाटी और चूरमा

दिल्ली में बहुत धुंआ भर जाता है, और आकाश में धुंध। किसी को साफ़-साफ़ नहीं दिखता। राजनीति अंधी हो गई है और कूटनीति बहरी। अर्थनीति, व्यर्थनीति साबित हो रही है। नोटबंदी, कालेधन की नसबंदी नहीं कर सकी है तथा जी ...

लगे रहो मेरे भाईलगे रहो मेरे भाई

सुबह से डेटा आ रहे हैं। थोक में आ रहे हैं पर मुफ़्त में आ रहे हैं और मेरे मोबाइल में भरते जा रहे हैं। सरकारी ख़जाने में टैक्स भरते जाओ, भरते जाओ, पर उसका पेट नहीं भरता। मेरे मोबाइल ...