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व्यंग्य-संग्रह

सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?

पेपरबैक संस्करण : 2020
किताबगंज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित

मूल्य रु. 200.00

हास्य-व्यंग्य संकलन : धर्मपाल महेंद्र जैन के ख्यात और व्यापक कैनवास पर रचे इकत्तीस नटखट निबंधों की पहली किताब है जिसमें व्यवस्था और समाज की विसंगतियों पर सटीक व्यंग्य है। हमारे आम चरित्र का भंडाफोड़ करने वाली यह किताब सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, हमारे सोच और कार्य में बदलाव के लिए एक विचारोत्तेजक पहल भी है।

पुस्तक यहाँ उपलब्ध है

व्यंग्य-संग्रह

सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?

प्रथम संस्करण : 1984 (अनुपलब्ध)
कृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित

ई-बुक – नॉटनल (2019)       
मूल्य रु. 45.00

हास्य-व्यंग्य संकलन : धर्मपाल महेंद्र जैन के ख्यात और व्यापक कैनवास पर रचे इकत्तीस नटखट निबंधों की पहली किताब है जिसमें व्यवस्था और समाज की विसंगतियों पर सटीक व्यंग्य है। हमारे आम चरित्र का भंडाफोड़ करने वाली यह किताब सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, हमारे सोच और कार्य में बदलाव के लिए एक विचारोत्तेजक पहल भी है।

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व्यंग्य-संग्रह

दिमाग वालों सावधान

प्रथम संस्करण : 2020
किताबगंज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित
मूल्य : रु. 250.00

‘दिमाग वालों सावधान’ में 51 व्यंग्य शामिल हैं। धर्मपाल महेंद्र जैन की इन व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से हम भारत के समकालीन परिवेश को जान सकते हैं, समझ सकते हैं और महसूस कर सकते हैं। ये व्यंग्य रचनाएँ हमारे देश में व्याप्त विसंगतियों की ओर पाठकों का ध्यान आकृष्ट करने में पूरी तरह सफल हुई हैं। कनाडा में रहते हुए भी धर्मपाल जी का दिल और दिमाग भारत में ही धड़कता है। यही कारण है इन व्यंग्यों में समकालीन भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक, पारिवारिक आदि स्थितियों का हू-ब-हू चित्रण हुआ है। इसलिए इसे अप्रवासी भारतीय की भारतीय व्यंग्य रचनाएँ संज्ञा दी जा सकती है। पुस्तक की छपाई साफ-सुथरी है और प्रूफ की गलतियाँ नहीं हैं।

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कविता-संग्रह

इस समय तक

प्रथम संस्करण : 2019
शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित
मूल्य : रु. 225.00

कविता संग्रह ‘इस समय तक’ में निरूपित प्रकृति का चित्रण कई-कई अर्थों में विशिष्ट कहा जा सकता है। यदि मानव-हृदय में संवेदनाओं का रोपण ढंग से कर दिया जाए तो हमारे समाज की आधे से अधिक चिंताएँ स्वत: समाप्त हो जाएँगी। यहाँ इस संग्रह में रचनाकार धर्मपाल महेन्द्र जैन का सम्वेदनाओं पर विशेष ज़ोर देना प्रशंसनीय है।प्रस्तुत संग्रह में प्रकृति के विभिन्न मनोरम चित्र खींचे गये हैं। उससे जुड़ी विभिन्न जानकारियों को प्रस्तुत गया है। अपने प्राकृतिक परिवेश की अनेक स्मृतियों का स्मरण किया गया है। प्रकृति से जुड़ी कई चिंताओं पर ध्यान खींचा गया है। परिवेश के बिगड़ने से उत्पन्न होने वाले ख़तरों के प्रति सचेत किया गया है। इन सभी ज़रूरी और उल्लेखनीय कार्यों के लिए रचनाकार श्री धर्मपाल महेन्द्र जैन को हार्दिक साधुवाद।

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