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आधुनिकता का चेहराआधुनिकता का चेहरा

मॉल में हमें कुछ ख़रीदना नहीं होता चीज़ों को उलटने-पलटने और कीमतें देखने के सिवा। श्रृंगार कविता-सी सजी-धजी मॉल फ़ुरसत के वक़्त में रूमानी बना देती है इसके चलते कागज़ का अधिकृत टुकड़ा अर्थशास्त्र बन जाता है। मॉल में कई ...