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प्रवासी कवि की कविताएँ – प्रकृति और जीवन के सहकार के लिएप्रवासी कवि की कविताएँ – प्रकृति और जीवन के सहकार के लिए

प्रो. बी.एल. आच्छा धर्मपाल महेन्द्र जैन से मेरा साक्षात्कार उनके व्यंग्यों की मार से ही हुआ है। इतने चुभते-चुभाते काँटों के बीच ‘इस समय तक’ का काव्य राग सर्वथा अलहदा है। ये कविताएँ जितनी राग वत्सल हैं, उतनी ही अपने ...