Month: October 2020

व्यंग्य लेखन खुद को पवित्र या नैतिक सिद्ध करने की कला नहीं बनेव्यंग्य लेखन खुद को पवित्र या नैतिक सिद्ध करने की कला नहीं बने

कवि व व्यंग्यकार श्री धर्मपाल महेंद्र जैन से डॉ. सत्यवीर सिंह की बातचीत बैंकिंग, अर्थशास्त्र, विज्ञान, पत्रकारिता तथा साहित्य की व्यंग्य विधा को नयी ऊँचाइयों पर स्थापित कर भारती के भंडार को भरने वाले, मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले ...

‘इस समय तक’ में प्रकृति निरूपण‘इस समय तक’ में प्रकृति निरूपण

के. पी. अनमोल हिन्दी कविता और प्रकृति का बहुत पुराना संबंध रहा है। यह संबंध मानव इतिहास के लगभग प्राचीन संबंधों में एक होना चाहिए क्योंकि मानव-बोध ने जब आरम्भ में आँखें खोली होंगी तो सबसे पहले प्रकृति को ही ...